जो मिला हमें यहाँ वही प्रसाद है …

जो मिला हमें यहाँ वही प्रसाद है। न हर्ष है, अमर्ष है, न भय विषाद है।।ध्रु.।। देह गेह सुख दु:ख सब कर्म-भोग हैं। सुयोग हैं कभी कभी, कभी कुयोग हैं। है प्रसाद सब कुछ यह निर्विवाद है। जो मिला हमें यहाँ वही प्रसाद है।।१।। कब कितना देना है, जानता वही। जिसको जो देना है बाँटता...

आँखों से देखी दुनिया …

आँखों से देखी दुनिया, पर आँखों को देख न पाए हम। आँखों को देख सकें ऐसी आँखें अब कैसे लाएँ हम।।ध्रु.।। आँखों की खिड़की के पीछे बैठा जो सब कुछ देख रहा। आँखों के आगे जो कुछ है, उन सब को जो है व्याप रहा। उस द्रष्टा का दर्शन तुमको किस साधन से करवाएँ हम।।१।। मुरदे की होती आँख...

जड का चेतन से क्या नाता …

जड का चेतन से क्या नाता।।ध्रु।। जड जड है, चेतन चेतन है। एक शुद्ध औ’ एक मलिन है। तम में कैसे हो सकती है। चित्प्रकाश भासकता।।१।। मैं ‘मैं हूँ’ यह ज्ञान मुझे है। क्या अपना कुछ भान उसे है? पुष्प अचेतन कैसे जाने। निज गंधित सुंदरता।।२।। जड में है प्रतिपल परिवर्तन। नष्ट हो...

मुझे तो ब्रह्म देत दिखलाई …

नहीं दिखाई देता मुझको जगत कहीं भी भाई। मुझे तो ब्रह्म देत दिखलाई।।ध्रु.।। निराकार निर्गुण की छवि ही सगुण रूप धर आई। उसीने बहु बन सृष्टि रचाई।। अपनी माया की मस्ती से मति उसकी बौराई। रज्जु ही सर्प देत दिखलाई।। माया तो प्रभु की काया की है केवल परछाई। वेद सब देते यही...
प्रभु से खेली क्यों होली …

प्रभु से खेली क्यों होली …

सखि, साड़ी आज भिगो ली। भीगी अँगिया औ’ चोली। मैं निपट निगोड़ी भोली, प्रभु से खेली क्यों होली।।ध्रु।। वह चोर जार गिरधारी। भर ले आया पिचकारी।...

तू स्पंदन है मेंरे उर का …

तू स्पंदन है मेंरे उर का …

तू स्पंदन है मेंरे उर का, तू श्‍वासों का अनुगुंजन है। आलंबन है तू जीवन का, मैं सीता तू रघुनंदन है।।ध्रु.।। जड काया को निज माया से, तू कर...

प्रभु तुम्हारे पदकमल पर …

प्रभु तुम्हारे पदकमल पर …

प्रभु तुम्हारे पदकमल पर मन सदा एकाग्र हो। कार्य यह अविलंब हो, प्रभु शीघ्र हो अतिशीघ्र हो।।ध्रु.।। वानरों सा कूदता मन वृक्ष से दीवाल पर। इस...

हा खेळ खेळूनि दावू …

हा खेळ खेळूनि दावू …

हा खेळ खेळूनि दावू प्रभुला हा खेळ खेळूनि दावू।।ध्रु.।। कोणी म्हणती टिपऱ्या याला। कोल म्हणती कांही जण ज्याला। माणिकनगरीं जाऊ हा खेळ खेळूनि...

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मैंने प्रभु से खेली होली …

मैंने प्रभु से खेली होली …

ले गुलाल, प्रभु पर डाल, मल कर गाल, खेली होली। मैंने प्रभु से खेली होली।।ध्रु.।। शुभ्र-धवल सद्गुण पहचाना। लाल-गुलाबी राजस जाना। कृष्ण-धूम्र...

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देखो साक्षी बन अपने को …

देखो साक्षी बन अपने को …

देखो साक्षी बन अपने को। सुख दु:ख के सपने को।।ध्रु.।। पहले तुम निज काया देखो। औ’ उसकी सब माया देखो। देखो सांसों के आने को औ’ देखो जाने...

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जहाँ मैं अड़ा हूँ …

जहाँ मैं अड़ा हूँ …

जहाँ मैं अड़ा हूँ, वहाँ तुम नहीं हो। जहाँ तुम खड़े हो वहाँ मैं नहीं हूँ।।ध्रु.।। गली प्रेम की ये बड़ी संकरी है। बड़ी तंग है औ’ मुसीबत भरी है।...

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नाम जिसका है न कुछ …

नाम जिसका है न कुछ …

नाम जिसका है न कुछ लूँ नाम उसका किसलिए? रूप जिसका है न वह किस काम का मेंरे लिए।।ध्रु.।। वह स्वयं कहता कि उसका नाम ‘माणिक’ है नहीं। देह...

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प्रतिपल मरने की घटना को …

प्रतिपल मरने की घटना को …

प्रतिपल मरने की घटना को लोग यहाँ जीवन कहते हैं। पहन हाथ में पीतल, उसको सोने का कंगन कहते हैं।।ध्रु.।। मरने के अतिरिक्त यहाँ तुम क्या कर...

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सच्चित्सुख तव जय हो …

सच्चित्सुख तव जय हो …

सच्चित्सुख तव जय हो। श्री माणिकप्रभु जय जय हो।। भक्तकार्यकल्पद्रुम गुरुवर सकलमतस्थापक विधि-हरि-हर।। ध्रु.।। व्याप्त सकल कण कण में। तुम...

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मार्तंड पराक्रमचंड …

मार्तंड पराक्रमचंड …

मार्तंड पराक्रमचंड कीर्तिउद्दंड शमवि पाखंडा। उंचवी प्रभो निज सकलमताचा झेंडा।।ध्रु.।। माणिक्य सकलसुरमुख्य दीप्तिदैदिप्य तेजजाज्ज्वल्या। हे...

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