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Shri Manik Prabhu Samsthan

Shri Datta Jayanti Mahotsava 2026

Samadhi

Shri Datta Jayanti Mahotsava 2026

Samadhi

Shri Datta Jayanti Mahotsava 2026

Shri Datta Jayanti Mahotsava 2026 - Programme

TEERTHA SNAAN

Fri. 18th Dec. 2026

02:00 PM: Teertha Snaan
03:00 PM: Yogadanda Poojan
08:30 PM: Maha-Prasad

SAKAL DEVATA NIMANTRAN

Sat. 19th Dec. 2026

10:00 AM: Ganapati Homa
02:00 PM: Sakal Devata Nimantran
08:30 PM: Maha-Prasad

TEERTHA SNAAN

Fri. 18th Dec. 2026

02:00 PM Teertha Snaan
03:00 PM Yogadanda Poojan
08:30 PM Maha-Prasad

SAKAL DEVATA NIMANTRAN

Sat. 19th Dec. 2026

10:00 AM Ganapati Homa & Chandi Paath
02:00 PM Sakal Devata Nimantran
08:30 PM Maha-Prasad

PRABHU PUNYATITHI

Sun. 20th Dec. 2026

06:49 AM Suprabhat Seva
07:30 AM Maharudrabhishekam
10:30 AM Rajopachar Seva
03:00 PM Aaradhana
08:30 PM Maha-Prasad

PRABHU DWADASHI

Mon. 21st Dec. 2026

10:00 AM: Sangam Snaan
11:00 AM: Maharudrabhishekam
02:00 PM: Rajopachar Seva
08:30 PM: Maha-Prasad

GURU POOJAN

Tue. 22nd Dec. 2026

09:00 AM: Maharudrabhishekam
01:00 PM: Dakshina Darbar & Guru Poojan
06:30 PM: Shreeji’s Pravachan
08:30 PM: Maha-Prasad

PRABHU JAYANTI

Wed. 23rd Dec. 2026

08:00 AM: Maharudrabhishekam
01:00 PM: Darshan & Padyapooja
07:00 PM: Rajopachar Mahapooja
09:00 PM: Maha-Prasad

PRABHU DARBAR

Thu. 24th Dec. 2026

11:30 PM: Prabhu Darbar begins
12:00 AM: Prabhu Janmotsava
01:00 AM: Sangeet Sabha begins
07:30 AM: Shobha Yatra

Donate for Datta Jayanti Annadaan 2026

ANNADAAN forms an integral and important part of the Annual Datta Jayanti Mahotsav, where thousands of visiting devotees, irrespective of caste, creed, or religion, partake in the bliss of MAHA PRASAD. Visiting devotees will be provided MAHA PRASAD during this year’s Datta Jayanti Mahotsava beginning. You can associate yourself with the ANNADAAN SEVA by sponsoring any one or more of the following PRASAD ITEMS that will be prepared in the Bhadarkhana during the Mahotsava. All donations towards Datta Jayanti Annadaan are exempt from income tax under Section 80-G of the Indian Income Tax Act, 1961.

Shri Datta Jayanti Mahotsava Nimantran Patrikain Marathi, Hindi, Kannada and Telugu

श्री दत्तजयंती महोत्सव निमंत्रण पत्रिका – २०२६

पराभवनाम संवत्सर १९४८, श्री माणिक शके २०९

श्री ज्ञानराज माणिकप्रभु

श्री भक्तकार्यकल्पद्रुम गुरुसार्वभौम श्रीमद्राजाधिराज योगिमहाराज त्रिभुवनानन्द अद्वैत अभेद निरञ्जन
निर्गुण निरालम्ब परिपूर्ण सदोदित सकलमतस्थापित श्री सद्गुरु माणिकप्रभु महाराज की जय!


श्रीमद्भगवद्गीतेच्या नवव्या अध्यायांत श्रीभगवान् म्हणतात – “तूं आपलें मन माझ्या ठायीं लाव, माझा भक्त हो, माझें पूजन करणारा हो आणि मला नमस्कार कर. अशा रीतीनें मत्परायण होऊन आपला आत्मा माझ्याशी युक्त केला असतां तूं माझ्याच स्वरूपास प्राप्त होशील.”
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥
हाच उपदेश पुनरपि दृढ करून अठराव्या अध्यायाच्या अखेरीस श्रीभगवान् म्हणतात – “तूं मच्चित्त हो, माझा भक्त हो, माझें पूजन करणारा हो आणि मला नमस्कार कर. अशा रीतीनें तूं मलाच प्राप्त होशील. तूं मला प्रिय आहेस, म्हणून हें सत्य वचन मी तुला प्रतिज्ञापूर्वक सांगत आहें.”
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥
उपर्युक्त उभय श्लोकांत मुख्यत्वें चार गोष्टी सांगितल्या आहेत १) मन्मना भव – माझ्या ठायीं मन लाव; २) मद्भक्तो भव – माझा भक्त हो; ३) मद्याजी भव – माझी उपासना कर; आणि ४) मां नमस्कुरु – मला नमस्कार कर. या सर्वांचें फल काय तर, मां एव एष्यसि – तूं माझ्याच स्वरूपास प्राप्त होशील. यांतील विशेष हा कीं, हें आश्वासन श्रीभगवंतांनी प्रतिज्ञापूर्वक दिलें आहे.
श्रीप्रभूंच्या ठायीं मन लावण्यास, त्यांची अनन्य भक्ति करण्यास, त्यांची उपासना करण्यास आणि त्यांस नमस्कार करून त्यांच्या स्वरूपाचा अद्वैतसाक्षात्कार करून घेण्यास श्रीजयन्त्युत्सवापेक्षां अधिक उचित असा अन्य कोणता प्रसंग असूं शकेल? म्हणून अत्यंत आनंदानें सुचवितो की श्रीप्रभूंचा महामांगल्यप्रद २०९ वा श्रीदत्तजयंत्युत्सव मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, रविवार २० डिसेंबर २०२६ पासून मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार २४ डिसेंबर २०२६ पर्यंत संलग्न कार्यक्रमानुसार अत्यंत वैभवपूर्वक सुसंपन्न होत आहे. अस्तु या महन्मंगल प्रसंगी आपण सर्वानी सकुटुंब सपरिवार स्वाश्रितजनसमेत शुभागमन करून श्रीदर्शन तीर्थप्रसाद सेवन व भजनानंद क्रीडेने आमचा आनंद वृद्धिंगत करावा. कळावे.
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श्री दत्तजयंती महोत्सव निमंत्रण पत्रिका – २०२६

पराभवनाम संवत्सर १९४८, श्री माणिक शके २०९

श्री ज्ञानराज माणिकप्रभु

श्री भक्तकार्यकल्पद्रुम गुरुसार्वभौम श्रीमद्राजाधिराज योगिमहाराज त्रिभुवनानन्द अद्वैत अभेद निरञ्जन
निर्गुण निरालम्ब परिपूर्ण सदोदित सकलमतस्थापित श्री सद्गुरु माणिकप्रभु महाराज की जय!


श्रीमद्भगवद्गीता के ९वें अध्याय में श्रीभगवान्‌ कहते हैं – ‘‘तुम मुझमें अपना मन लगाओ, मेरे भक्त बनो और मेरा पूजन करनेवाले बनो; मुझे नमस्कार करो; इस प्रकार मत्परायण होकर आत्मा को मुझसे युक्त करके तुम मेंरे स्वरूप में मिल जाओगे।’’
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥
इसी उपदेश को पुन: दोहराते हुए १८वें अध्याय के अंत में श्रीभगवान्‌ पुन: कहते हैं – ‘‘तुम मच्चित, मद्भक्त और मेरे पूजक बनो और मुझे नमस्कार करो; इस प्रकार तुम मुझे ही प्राप्त होगे; यह मैं तुम्हे सत्य वचन देता हूँ, क्योंकि तुम मेरे प्रिय हो।’’
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥
उपर्युक्त दोनों श्लोकों में मुख्यत: चार बातें कहीं गईं हैं – १) मन्मना भव – मुझ में मन लगाओ, २) मद्भक्त: भव – मेंरे भक्त बनो, ३) मद्याजी भव – मेंरी उपासना करो, ४) मां नमस्कुरु – मुझे नमस्कार करो। इन सब का फल क्या है? मां एव एष्यसि – तुम मेंरे ही स्वरूप में मिल जाओगे। विशेषता यह है कि यह आश्वासन श्रीभगवान्‌ ने शपथपूर्वक दिया है।
प्रभु में मन लगाकर, उनकी अनन्य भक्ति के लिए, उनकी उपासना के लिए और उन्हें नमस्कार कर उनके स्वरूप के अद्वैत साक्षात्कार के लिए श्रीजयंत्युत्सव से अधिक उपयुक्त अन्य कोई अवसर हो ही नहीं सकता, अत: अत्यंत आनंदपूर्वक सूचित करता हूँ कि श्रीप्रभु का महामांगल्यप्रद २०९वाँ श्रीदत्तजयंत्युत्सव मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, रविवार २० दिसंबर २०२६ से मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा गुरुवार २४ दिसंबर २०२६ तक संलग्न कार्यक्रमानुसार अत्यंत वैभवपूर्वक सुसंपन्न हो रहा है। अस्तु इस महन्मंगल अवसर पर आप सभी सकुटुंब सपरिवार स्वाश्रितजनसमेत शुभागमन कर श्रीदर्शन तीर्थप्रसाद सेवन व भजनानंद क्रीड़ा से हमारे आनंद को वृद्धिंगत करें।
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